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हरड़ करे दांत दर्द को छूमंतर

आयुर्वेद में हरड़ का खास स्थान है | कई बीमारियों में यह घर का डॉक्टर साबित होता है | आपके घर में क्या जरुरी है और इसके क्या-क्या फायदे हैं, बता रहे हैं  वैद्य हरिकृष्ण पांडेय 'हरीश'




हरड़ का एक नाम अमृता भी है | अमृता का अर्थ है जो शरीर को स्वस्थ एवं निरोग रखने में सक्षम हो | यंहा  यह बताना अति आवश्यक है कि हरड़ के बिना त्रिफला चूर्ण बन ही नहीं सकता | तीनों फल यानी हरड़, बहेड़ा, और आंवला को मिला कर कूट पीस कर जो चूर्ण बनाया जाता है, वही त्रिफला चूर्ण  कहलाता है |

हरड़ का सेवन करने का तरीका अलग है | हरड़ को चबा कर खाने से भूख बढ़ती है | चटनी की तरह पीस कर खाने से कब्ज दूर होती है | भून कर खाने से (त्रिदोष) वात, पित्त, कफ की विकृति दूर होती है | भोजन साथ खाने से बल पौरुष की वृद्धि होती है, बुद्धि बढ़ती है और पखाना व पेशाब साफ़ होता है |

औषधीय प्रयोग :- 


  1. इसका लेप करने से सूजन मिटती  है | दर्द में लाभ होता है |  घाव पर लगाने से वह जल्दी भरता है | कब्ज दूर कर लीवर को मजबूत बनता है | 
  2. इसके सेवन से पेट के कीड़े नष्ट होते है | बहते खून पर इसका चूर्ण या काढ़ा प्रयोग किया जाए तो खून का बहाव बंद होता है | 
  3. इसका काढ़ा बना कर धोने से गर्भाशय की सूजन मिटती  है | इसका काढ़ा बना कर कुल्ला करने से मुंह के छाले से राहत मिलती है | बवासीर में हरड़ का लेप पीड़ा एवं जलन को शांत करता है | 
  4. दांत दर्द में इसका महीन चूर्ण बना कर मंजन करने से लाभ होता है मंजन करने के बाद इसी के काढ़े से कुल्ला करने से मसूड़े मजबूत होते है | मसूड़ों से आने  वाला खून बंद होता है | ठण्डा -गर्म लगने की स्थिति में काढे  का कुल्ला करना फायदेमंद  होता है | 
  5.  मुंह की दुर्गन्ध को दूर करने में काढ़े का कुल्ला हितकर है | 
  6. हरड़ के चूर्ण को गुड़ मिला कर खाने से बवासीर में  लाभ होता है | 
  7. दमा (अस्थमा) के दौरे के समय इसको कूट कर चिलम में रख कर धूम्रपान से लाभ होता है | 
  8. भूख कम लगे तो इसका मुरब्बा खाना फायदेमंद  होता है | 
  9. आँखे लाल रहती हो,  उनमे जलन होती हो तो रात को हरड़ को पानी में भिगो कर रख दें | उस पानी से सवेरे आँख धोना लाभकारी है | मलेरिया बुखार में हरड़ का चूर्ण शहद के साथ चाटना  फायदेमंद है | 
  10. नाड़ी दुर्बलता, मस्तिष्क  दुर्बलता, वात व्याधि एवं दृष्टि दुर्बलता में इसका सेवन लाभकारी है | 
  11. पुराने जमाने में दादी माँ नवजात शिशु को हरड़ की घुट्टी देती थीं, जो बच्चों की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ा कर उन्हें स्वस्थ रखने में सहायक थी | 

वैद्य हरिकृष्ण पांडेय 'हरीश '


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