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गाँव का डॉक्टर नीम

कहने सुनने में अजीब लगता है, लेकिन है सुच।  क्यूंकि नीम इतने गुणों का मालिक है कि इसके गुणों की जितनी प्रशंसा की जाय कम है।







गाँवो जहां तहां अपने आप उगने और बिना किसी विशेष देखभाल के सदा हरा भरा लहराने वाला नीम वास्तव में कुदरत का करिश्मा है।  अनेको स्वास्थ्य रक्षक गुणों का खजाना समेटे हर जगह सुलभ है।  वैज्ञानिक नाम अजाडीरेक्ट इंडिका है।  फ़ारसी में इसे आजाद दरख्त-ऐ हिन्द कहते है जिसका अर्थ है ' भारत का स्वतंत्र वृक्ष' "नीम " इसका तना, जड़, छाल, टहनिया, पत्तियां, फूल, फल आदि सब दैनिक जीवन में औषधियों, कीटनाशकों एवं अन्य प्रयोगो में लाया जाता है।  इसी लिए विद्वानों ने इसे प्राकृतिक "वैद्य " की संज्ञा दी है।

पर्यावरण विशेषज्ञों, प्रकृतिविदों, चिकित्साविदों, कृषि एवं वन विशेषज्ञों ने इसको, वायरस रोधी, क्षयरोग नाशक, बैक्टीरियनाशक, फफूंदीनाशक, फोड़ा, खाज, खुजली नाशक, सूजन हरने वाला दांतरोग, चर्म रोग नाशक,  कीट नाशक के लिए बहुउपयोगी माना है।   इसका एक नाम कल्प  वृक्ष या देव वृक्ष भी है।

औषधीय प्रयोग :- 


  1. ज्वर (बुखार )  एक भाग नीम की छाल को कूटकर दस भाग पानी में आधा घंटा उबाल कर चौथाई भाग शेष रहने पर ठंडा कर दो-दो चम्मच सवेरे शाम प्रयोग करने से ज्वर में लाभ होता है।  
  2. जुकाम इसकी पत्तिया पन्द्रह ग्राम काली मिर्च सात को घोट पीस कर एक एकेक मिली. ग्राम की गोली बना एक एक गोली सवेरे शाम गर्म पानी से लेना नजला, जुकाम में लाभकारी है 
  3. पेट के कीड़े  इसकी पत्तियों को बैगन या अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर प्रयोग करने से  लाभ होता है। पांच बून्द इसका तेल चाय में डालकर पिलाना  भी कीड़े मरने में मददगार है 
  4. दस्त लगने पर   इसकी कोमल पत्तिया सुखाकर पीस कर पानी के साथ पीने से लाभ होता है 
  5. पेचिश में अंदर वाली छाल तवे पर भूनकर  दही के साथ खाना हितकर है।  
  6. बवासीर में इसके तेल की पांच बून्द रोज  पताशे में लेना लाभकारी है 
  7. मधुमेह (डाइबिटीज )  नीम का  (पंचाग ) छाल, पत्ती, जड़, फल  का काढ़ा बना कर पीना लाभकारी है। 
  8. रक्त प्रदर में इसके तेल की पांच -पांच बून्द गाय के दूध में डाल कर  दो बार दिन में देना हितकर है।  
  9. चेचक में इसका बीज, हल्दी बहेड़ा को बराबर मार्त्र में मिला पीस ले आधा चम्मच सवेरे शाम पानी से लेने से चेचक निकलने का भर नहीं रहता।  
  10. लू  लगने पर इसकी कोमल पत्तियों के रस में मिश्री मिला क्र पिने से लाभ होता है। 
  11. खाज खुजली में इसके पत्तों  को उबाल कर नहाना और इसके तेल को लगाना गुणकारी है। 
  12. घाव न भरता हो तो इसकी पत्तियों को सुखाकर शहद में मिला  कर लगाने से घाव भरता है। 
  13. बाल झड़ने पर इसके पतों को उबाल कर सुहाते सुहाते पानी से सर धोये तथा उबले पतों को धीरे धीरे सिर पर रकडे लाभ होगा।  
  14. बिच्छु के डंक मारने पर इसकी छाल, पत्तिया या फलो के तम्बाखू की तरह चिलम में भर पिये विष उतर जायेगा।  
  15. पसीना अधिक आये तो इसके पतों को सूखा कर पावडर बना ले नहाने के बाद बदन पर लगाए लाभ होगा।  
वैद्य हरिकृष्ण पांडेय 'हरिश '

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