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भोजन और स्वास्थ में हल्दी का उपयोग

हमारे देश में कई इलाके ऐसे है । जहाँ  चटपटा और तरी दार सब्जी खाने के शोकीन है । वह अन्य मसालों के साथ जायका बनाने के लिए हल्दी का इस्तेमाल भी खूब करते है । यह दाल  सब्जी का स्वाद बनाने के साथ -साथ रंग में भी बदलाव लाती है । शुभ अवसरों एवं तीज त्योहारों  पर भी इसका प्रयोग किया जाता है , जैसे नए घर में जाना ,बच्चे के जन्म पर ,विवाह आदि अवसरों पर भी उपयोग में लाई जाती है । नयी पीड़ी के लोग तो इसको एक मसाले के अलवा कुछ मानते ही नही लेकिन इसमें बहुत से औषधीय गुण छिपे हुए है । हम इसके कई गुण और कई उपयोगों, कई नामों की विस्तार से जानकारी दे रहे है । जिसके प्रयोग से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है ।






इसको गौरी , क्रिमिघना ,हट्टविलासनी ,हरदल ,कुंमकुंम, टर्मरिक हल्दी के नामों से भी जानते है  । वैसे तो घेरेलु उपचार में इसका  प्रयोग हमारी दादी नानी करती रही है । लेकिन अब व्यस्त जीवन शैली के कारण लोग भूलते जा रहे है , यहाँ हम कुछ हल्दी के घरेलू उपचार बता रहे है जो इस प्रकार है । 

हल्दी  गुमचोट , कफ़,ख़ासी, दन्त रोग ,फोड़े, सोंदर्ये वर्धक लेपों एवं कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करने ,मधुमेह , पाचन तंत्र को उन्नत करने शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है ।

गुमचोट :- लगने पर हल्दी का पाउडर एक चम्मच ,चूना आधा चम्मच, पानी में घोल कर  लेप बना कर चोट वाली जगह लगा दें  । सुविधा हो तो उपले की आग़ से हल्का -हल्का सेक देने से दर्द में लाभ होगा और सूजन मिटेगी ।

कफ़ ,ख़ासी :- होने पर आधा चम्मच हल्दी चूर्ण एक चम्मच शहद में मिला कर चाटने से , एक चम्मच हल्दी  ,एक चम्मच नमक एक ग्लास गर्म पानी में मिला कर गरारे करने एवं, हल्दी को उपले के अंगारे पर डाल कर आँख बाद कर नाक से सूघने से कफ़ ख़ासी, जुकाम, गले की खराश में लाभ होता है ।

दांतों के रोग :-दांतों में चीस चलना ,मसूड़ों से खून आना ,मसूड़े फूलना ,ठंडा- गर्म ,पानी लगना आदि में एक चम्मच हल्दी कोसे पानी में मिला कर कुल्ला करने से , हल्दी और नमक को सरसों के तेल में मिला कर अंगली से मसूड़ों पर धीरे धीरे मलने से लाभ होता है ।

फोड़े :- फोड़े होने पर आधा-आधा  चम्मच हल्दी पाउडर सवेरे शाम पानी से लेने और हल्दी को मोचरस के साथ सरसों के तेल मिला कर फोड़े पर लगाने से चैन मिलता है ।

सोंदर्ये वर्धन :- के लिए तरह- तरह  के क्रीम ,पाउडर ,लोशन का  धड़ल्ले से इस्तेमाल करते है । लेकिन गागर में सागर "हल्दी" के उपयोग को न जानने के कारण पैसा और समय दोनों बर्बाद करते है । अपेक्षित लाभ के लिए हल्दी को शहद में मिला कर ,हल्दी दही  मिला कर ,हल्दी  बेसन सरसों का तेल मिला कर , कुछ देर चेहरे पर लगा कर गुनगुने पानी से धोना लाभकारी है । मलाई और हल्दी मिलाकर चेहरे पर धीरे- धीरे नीचे से उपर की तरफ़ फिर गोलाई में बिना दबाव डाले हल्के हाथ से मसाज करे चेहरे पर  दाग धब्बे हो तो बराबर मात्रा में काले तिल पीस के मिला कर चेहरे पर मले इस उपचार से रूप निखार की आशा की जा सकती है ।

कोलोस्ट्रोल मधुमेह , पाचन तन्त्र ,प्रतिरोधक शक्ति आदि  में अनुपान भेद से चिकत्सक हल्दी का प्रयोग करवाते है  ।


उक्त उपचार सामन्य है प्रयोग करने से पहले स्थानीय चिकत्सक से सलाह अवश्य ले ।

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