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पानी का,अमृत सिघाड़ा


प्रकृति के अथाह रत्न सागर में असंख्य स्वास्थ्य पोषक रत्न सिघाड़ा भी है । संसार में जितनी भी जड़ -चेतन प्रदार्थ है ,सब में पानी का योगदान है । लेकिन सिघाड़ा  तो पैदा ही पानी में होता है इसको जितने भी पोषक तत्व चाहिए वह सारे उसे पानी से ही प्राप्त होते है ।इसलिए इसको पानी का मक्खन कहदें तो कोई अतिश्योक्ति नही है ।
 पौष्टिकता से भरपूर सिघाड़े में प्रोटीन,कार्बोहाइड्रेट ,विटामिन बी ,सी ,आयरन,कैल्शियम, मैग्नीशियम ,फास्फोरस ,आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते है ।

आयुर्वेद में सिघाड़े को भैसं के दूध की तुलना में 22 % से अधिक खनिज लवण और क्षार तत्व पाए जाते है । अनुसंधानकर्ताओ  ने इसे अमृत तुल्य  माना है । और पौष्टिकता का खज़ाना बताया है । अपने में कई औषधीय गुणों को छिपाये यह मदुमेह ,अल्सर ,ह्दय रोग और गठिया जैसे रोगों में मददगार है ख़ासकर वृदाव्स्था वाले ,और गर्भवती महिल।ओं के लिए तो बहुत ही उपयोगी है ।







अन्य रोगों में भी उपयोगी सिघाड़ा का विवरण यह है ।

·        थायोराइड की बीमारी में इसका सेवन लाभकारी है क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में मौजुद आयोडीन ,मैग्नीज जैसे मिनरल्स , थायराइड की रोकथाम में अहम भूमिका निभता है ।
·        गले की खराश ,ख़ासी और कफ़ के लिए लाभकारी है ।
·        टोन्सिल ,गले का दर्द के लिए इसमें मौजूद आयोडीन,इस बीमारी में लाभ करता है । इसमें इसका फल या चूर्ण दोनों के सेवन से लाभ होता है ।इसको पानी में उबाल कर  कुल्ला करना भी हितकर है ।
·        असमय या समयपूर्व गर्भपात की परेशानी से बचने के लिए उपयोगी है । गर्भपात गर्माश्य की दुर्बलता और पित को अधिकता से समय से पहले गर्भपात होता हो तो सिघाड़ा खाना अति लाभदायक है । इससे गर्भ स्तर भूर्ण को पोषण मिलता है । सिघाड़े के नियमित सेवन से गर्भस्त शिशु स्वस्थ और सुंदर होता है ।
·         यौन दुर्बलता दूर करने के लिए दो चम्मच आटा गुनगुने दूध में लेना हितकर है ।
·        सूजन और दर्द में तो कमाल करता है । प्रभावित अंग पर इसके छिलकों को पीस कर लगाने से आरम मिलता  है । यही लेप चेहरे की झुरियाँ कम करने में भी मददगार है । और सूर्ये से निकलने वाली पैर।  बैंगनी किरणों से भी त्वचा की रक्षा करता है ।
·        बाल जड़ते हो तो इसके सेवन से लाभ होता है ।
·        दुबले पतले लोगों के लिए वरदान सिघाड़ा पुष्ट और बलवान होता है ।
·        बुखार की घबराहट में 10-20 ग्राम सिघाड़े खाना हितकर है ।
·        दाद, खुजली में सिघाड़े को नींबू के रस से पीस कर लगाना लाभ करता है ।
·        नकसीर (नाक से खून आना ) इस बीमारी से परेशान लोगों को कच्चे सिघाड़े खाना लाभ करता है ।
·        उपवास व्रत रखने वाले उर्जा प्राप्ति के लिए उसका सेवन करते है ।
·        पीलीया के रोगी को इसका सेवन लाभकारी है । सिघाड़ा खाना या इसका जूस पीना दोनों ही हितकर है ।
·        बवासीर के रोगी को इसका सेवन करना लाभकारी है । कुछ दिन लगातार सेवन से लाभ होता है ।
·        रक्त संबंधी समस्या , मूत्र रोग,और दस्त में सिघाड़े का सेवन लाभकारी है ।

इतना लाभकारी होने के बाद भी इसमें कुछ दुर्गुण है जो सेवन के समय ध्यान रखने चाहिए ।

अधिक मात्रा में सिघाड़े खाने से पाचन प्रण।ली प्रभवित हो कर भूख कम करती है । साथ ही कब्ज, पेट दर्द, आंतो की सूजन भी हो सकती है ।


इसके  खाने के बाद पानी भूल कर भी न पीये । इसके ज्यादा खाने से कफ़ रोग की समस्या भी हो सकती है अथाह निर्धारित मात्रा में सेवन कर लाभ उठाये । उक्त सभी उपचार सामन्य है प्रयोग करने से पहले स्थानीय चकित्सक से परामर्श करना जरुरी है ।

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