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अमरुद गुणों का पिटारा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आयुर्वेद के विद्वानों ने शरीर के लिए फलों का सेवन अत्यंत ही उपयोगी बताया है।  स्वस्थ तन-मन के लिए नियमित रूप से मौसमी फलों का सेवन बेहद जरुरी है।  अन्य फलों की तरह ही अमरुद भी एक लाभदायक फल है अपने स्वाद एवं गुणों के कारण ही यह आम आदमी का प्रिय फल है।  यह सर्वत्र आसानी से मिलने वाला सस्ता फल भी है। 






इसकी पैदावार भारत के हर हिस्से में होती है।  इसमें प्रोटीन खनिज-लवण, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, फॉस्फोरस और आयरन पाये जाते है।  इसके बीजो में आयरन (लोहे) की मात्रा अधिक होती है।  अमरुद कहते समय इसके बीजो को खूब चबा कर खाना चाहिए।  इससे विटामिन सी की प्राप्ति भी होती है।  लगभग सौ ग्राम अमरुद में 299 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है।  इसके छिलके में यह मात्रा अधिक होती है। 

तीन-चार साल के पेड़ पर फल आने शुरू हो जाते है।  जोड़े के मौसम में इसकी पैदावार खूब होती है।  एक खास तरह के अमरुद के अंदर का हिस्सा सफ़ेद की जगह लाल होता है जो बेहद गुणकारी है। 

अधिक अमरुद खाने से अजीर्ण हो जाए तो जरा - सी सौंफ या गुड़ खाने से तुरंत लाभ मिलता है।  छोटे बच्चों को अमरुद छिलका और बीज समेत चटनी की तरह पीस कर खिलाना चाहिए। 

कच्चे या अधपके अमरुद की सब्जी भी बनाई जाती है।  इसके साथ नमक और कालीमिर्च मिला कर खाना चाहिए।  कच्चा अमरुद बदहजमी करता है और छिलका उतार कर खाने से कब्ज होता है। 

जिन व्यक्तियों को पित्त प्रकृति, शरीर या हाथ - पावों में जलन महसूस होती हो, उनको भोजन के बाद नियमित रूप से इसका सेवन करना चाहिए।  लगातार कब्ज से परेशान रहने वाले व्यक्ति भोजन से पहले अमरुद अवश्य खाये।

गठिया रोग में गांठो या जोड़ों के दर्द पर अमरुद का लेप लाभकारी है।  इसके पते चबाने से दांत का दर्द दूर होता है।  इसके अलावा इसके पत्तो का काढ़ा बना कर शुद्ध फिटकरी मिला कर कुल्ला करने से दांतो से खून निकलना भी बंद हो जाता है। 

सिरदर्द की शिकायत हो तो अमरुद पत्थर पर पीस कर, सूरज निकलने से पहले सिर  पर लेप करने से लाभ होता है।  पुराना जख्म भरता न हो तो  इसकी जड़ के काढ़े में जख्म को धोना उपयोगी है।  खांसी-जुकाम दोनों ही तो भुने हुए अमरुद में नमक मिला कर खाना चाहिए।  भांग धतूरा आदि का नशा दूर करने के लिए अमरुद खिलाना  और पत्तो का रस पिलाना लाभकारी होता है। 

मधुमेह, पेशाब अधिक आना, प्यास अधिक लगना आदि में इसके दुकड़े पानी में डालकर  थोड़ी देर के लिए छोड़ दे।  बाद में उस पानी को छान कर पिने से उक्त विकारो से लाभ होता है। 

वैद्य हरिकृष्ण पांडये "हरीश"


















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