Header Ads

दांतो की देखभाल के देसी उपाय

दांतो की देखभाल के देसी उपाय 

शरीर के अन्य अंगो की सफाई की तरह ही दांतो की सफाई का भी ध्यान रखना जरुरी है, क्योंकि दांतो में पैदा होनेवाला दन्तक्षय भोजन में की गई लापरवाही की वजह से ही होता है।  जंहा भी कुछ खाया जाता है, वह खाने के बाद दांतो में चिपक जाता है।  बिना सफाई की वजह से उन पर जीवाणु पनपने लगते है, जिनके कारण दांतो को अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ता है।  हालत यंहा तक बन जाती है कि दांत निकलवाने पड़ते है और उनकी जगह नकली दांत लगवाने पड़ते है।  वैसे देखने में यह नकली दांत असली से भी सूंदर लगते है।  लेकिन सफाई की जरूरत इनको भी होती है।  यदि इनकी उचित देखभाल नहीं हुई तो कोई भी समस्या किसी भी समय खड़ी हो सकती है।  






दांत  एक हो या  पूरा जबड़ा, उनकी सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिये।  हर भोजन के बाद उन्हें निकालकर साफ़ करना व सोते समय पानी में डालकर रखना आवश्यक है।  कोशिश यही करनी चाहिए कि खाना-पीना समयानुसार करने के बाद दांतो को अच्छी तरह मंजन, पेस्ट से सुविधानुसार साफ़ कर दिया जाए।  क्योंकि लापरवाही से ही दांतो में कई व्याधियां पैदा हो जाती है, जैसे दांत हिलना, दांतो से खून आना, ठण्डा -गर्म पानी लगना, दांतो में गड्डे हो जाना आदि।  कई बार इतना ज्यादा संक्रमण दांतो में हो जाता है कि डाक्टर उन्हें निकलवाने की ही सलाह देते है।  

यदि मसूढ़े लाल हो जाये, दर्द करने लगे, ठण्डा - गर्म पाई लगने लगे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. इसमें भी लापरवाही की तो कुछ समय बाद मुँह में दुर्गन्ध, मसूड़ों से खून - पीप  आना शुरू हो जायेगा. पर यह सत्य है कि  दांतो को जितना अधिक स्वच्छ रखा जाएगा परेशानी उतनी ही दूर रहेगी।  

वैसे दांतो की सफाई की लिए दातुन भी महत्वपूर्ण है।  इससे मसूड़ों की उचित मालिश और सफाई अच्छी होती है।  नीम और बबूल की दातुन के अलावा जाल, शहतूत, जामुन और अपामार्ग की दातुन भी इस्तेमाल की जाती है।  अपामार्ग की दातुन तो कई दंत रोगो से छुटकारा दिलाती है।  अपामार्ग सब जगह मिलने वाला पौधा है।  क्षेत्रीय भाषाओँ में इसे खरमंजरी, चिड़चिड़ी चिरचिटा, पुठकण्डा और  ऊंगा  भी कहते है।  

दातुन एक बालिस्त यानी 6 इंच के करीब लम्बी और तर्जनी या छोटी अंगुली जैसी मोटी होनी चाहिए. इसके सिर को दाढ़ो में दबाकर धीरे-धीरे कुचलकर कूची बनानी चाहिये, फिर दांतो व मसूड़ों पर धीरे -धीरे ऊपर से निचे घुमाते हुए रगड़नी चाहिए।  दानो -मसूड़ों की मालिश के बाद दातुन को चीरकर दो हिस्से पर लेने चाहिए।  फिर बारी बारी से उसे जीभ पर रगड़कर जमी परत हटानी चाहिए।  इसके बाद कुल्ला कर मुँह, दांतो व मसूड़ों की पूरी सफाई करनी चाहिए।  वैसे, लोग प्लास्टिक, स्टील या ताम्बे की (जिब्भी) टंग क्लीनर का प्रयोग करते है।  ब्रश से भी दांत साफ़ करते समय सावधानी रखनी चाहिए।  ब्रश ज्यादा सख्त न हो।  ब्रश करने से पहले उसे पानी में डुबोकर धोना चाहिए।  धोने के बाद पेस्ट या मंजन लगाकर धीरे धीरे ऊपर से नीचे घूमाते हुए मसूड़ों और दांतो पर मलना चाहिए।  बच्चों की यह सब माँ-बाप अपने निगरानी में करवाए नहीं तो  बच्चा मसूड़ों छील सकता है।  

मंजन करते समय यह देखना जरुरी है कि मंजन बहुत ही महीन हो।  मंजन को भी अंगुली के साथ दांतो - मसूड़ों पर धीरे - धीरे मलना चाहिए।  

घरेलु उपाय 

  • खूब महीन पीसा नमक सरसो के तेल में मिलाकर दांतो-मसूड़ों पर लगाना लाभदायक है।  
  • दांतो से खून आने की स्थिति में फिटकरी के पानी से कुल्ला करना बहुत अच्छा है।  
  • मसूड़े कमजोर महसूस हो तो सुपारी पीसकर मंजन बनाकर लगाए, आराम मिलेगा।  
  • दांतो में पीलापन आने पर टंकण भस्म में बराबर मिश्री मिलाकर मंजन करे, लाभ होगा।  
  • जामुन के पत्ते जलाकर उस राख को मंजन की तरह प्रयोग करने से दांत मजबूत बनते है।  बादाम के छिलके जलाकर पीसकर कपड़े से छान ले।  इस मंजन से दांत स्वस्थ और सुद्रढ़ होते।  है 

वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश'



















 

कोई टिप्पणी नहीं