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कई रोगों में लाभकारी सीताफल

कई रोगों में लाभकारी सीताफल

 सीताफल के कई नाम,है जैसे लताफ़ल, लूना, महा, अनान और शुगर एप्पल।  हम सभी सीताफल को सब्जी के रूप में जानते है परन्तु इसके औषधीय गुणों के बारे में नहीं जानते।  आयुर्वेद के मतानुसार सीताफल तृप्ति दायक, स्वादिष्ट, शीतल, हृदय के लिए हितकारी और दाह को नष्ट करने वाला है।  यह पित्त को नष्ट करता है और वमन को शांत करता है।  इसका नियमित सेवन आपको कई परेशानियो से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित होता है। 






सबसे पहले बात करते है मिर्गी की।  यह अपने आप में कोई रोग नहीं बल्कि दिमागी बीमारी के लक्षण है।  ये मस्तिष्क में उठती हुई विधुत तरंगे है, जिनकी आवृति एवं फैलाव में किन्ही कारणों से असामान्यता पैदा हो जाती है और ये दौर का रूप ले लेती है, लेकिन सीता फल के सेवन से मिर्गी के दौरे की आवृति को कम किया जा सकता है।  इतना ही नहीं दस्त और प्रसव पीड़ा में भी राहत मिलती है।  इसके बीजों की मगज पीस कर सूती कपडे में बांधकर जला कर धुंआ लगाने से मिर्गी के दौरे में लाभ होता है।  

इसकी छल अतिसार रोकने में सहायक होती है।  चोट लगने से शरीर पर बनी गांठो पर सीताफल को कूटकर नमक मिलाकर बांधने से वे पक कर फुट  जाती है। 

इसके बीजो को पीस कर लेप करने से घाव के कीड़े नष्ट होते है।  इसके कच्चे फल को सुखा कर, पीस कर चने के आटे में मिलाकर लगाने से कीड़े मरते है।  इसके पत्तो को पानी में उबाल कर ठण्डा कर गुदा धोने से बच्चों के कांच निकले का रोग जाता है।  

इसके बीजो को पीसकर गर्भाशय पर लेप करने से प्रसव आराम से होता है।  इसके गीले पत्तो को पीस कर लुगदी बना कर बाँधने से पुराने -घाव - फोड़े ठीक हो जाते है।  


वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश'

  

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