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स्वास्थ्य का खजाना टमाटर

टमाटर भी किसी प्रकार से स्वास्थ्यरक्षण और स्वास्थ्यवर्द्धन के काम में काम नहीं है।  इसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है।  यह रुचिवर्द्धक, भूख बढ़ाने वाला, पाचन करने वाला, रक्तवर्द्धक और शाक्तिदायक है। इसके सेवन से पेट की बीमारियां, खासकर कब्ज दूर होती है।  स्वास्थ्य वृद्धि  जिन पोषक तत्वों की आवश्यकता है यह लगभगसभी टमाटर में पाए जाते है।  इसके सेवन से शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति पैदा होती है।  शरीर स्वास्थ्य और पुष्ट होता है। 









लौहा तत्व टमाटर में अधिक मात्रा में पाया जाता है।  अनुसन्धानकर्ताओं के अनुसार टमाटर में लोहे की मात्रा दूध से दुगनी और अंडे से पांच गुनी पाई जाती है।  प्याज मूली, शकरकंद, बैंगन गाजर, गोभी, केला, शलगम, सेब, संतरा, और मौसमी आदि की अपेक्षा लोहे की मात्रा टमाटर से डेढ़ गुनी ज्यादा होती है।  कैल्शियम की मात्रा भी टमाटर में दूसरे फलों से अधिक होती है इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम से गुणकारी एवं प्रभावकारी होता है।  जिन बच्चों  में कैल्शियम की कमी से कोई रोग पैदा होतो टमाटर या इसका रस देने से वह ठीक हो जाता इसके सेवन से बच्चो की हड्डिया भी मजबूत होती है। 

टमाटर में प्रोटीन, पोटास, फास्फोरस, गंधक, क्लोरीन आदि द्रव्य भी दूसरी साग-तरकारियों से अधिक होते है जो शरीर के पोषण केलिए आवश्यक है। 

इसमें मिलने वाला खट्टापन सामुद्रिक अम्ल जैसा है , जो नीम्बू और नारंगी से भी मिलता है।  यह सर्वदा स्वास्थ्यरक्षक और हानिरहित है।  इसमें विटामिन A , बी तथा C तीनो ही प्रचुर मात्रा में पाए जाते है।  इसमें पाए जाने वाले विटामिनो की यह विशेषता है कि अन्य फलों या सब्जियों में पाए जाने वाले विटामिन तो पकने या उबालने में नष्ट हो जाते है, लेकिन टमाटर में पाए जाने वाले विटामिन सदा सुरक्षित रहते है।  टमाटर के सेवन से दस्त साफ़ आता है, कब्ज दूर होती है , रक्त विकास दूर होते है।  यह गाठिया बाय और एग्जिमा में लाभ करता है।  बच्चो के सूखा रोग में, खाना न पचता हो तब, दांत निकलने के समय होने वाली परेशानिया टमाटर खिलाने या इसका रस पिलाने से दूर होती है तथा बच्चे के  स्वास्थ्य में लाभ करता है। 

लाल और पके टमाटर खाना ही स्वास्थ्य के लिये उत्तम माता है।  कच्चे, हरे दाग वाले या पिलपिले टमाटर नहीं खाने चाहिए।  टमाटर को बेसन में मिलाकर तलकर खाना बहुत हानिकारक है।  कच्चा खाना, सलाद बनाकर खाना, सब्जी या चटनी बनाकर खाना उपयोगी है।  खून खराबी  के कारण चमड़ी का रंग लाल रहने लगे, उंगलियों पर चिट उखड़ने लगे, मुँह की हड्डियों पर सूजन हो जाये, दांतों - मसूड़ों से खून आने लगे तो लाल टमाटर का रस चार - चार चम्मच लगभग 10 मि.ली. की मात्रा में तीन बार देने से लाभ होता है। 

इसका रस पीने से दुर्बलता, थकान, शारीरिक कमजोरी दूर होती है, भूख खुलकर लगती है, हाजमा ठीक रहता है।  शरीर सूंदर कांतिवान और बलवान बनता है।  इसका रस या काढ़ा तेज बुखार की बेचैनी में लाभ करता है।  और बुखार के कारण खून में बढ़े दूषित पदार्थो की वृद्धि को नष्ट कर शान्ति देता है। 

टमाटर के सेवन से खून की बढ़ोतरी होने से पेशाब में जाने वाली शर्करा (sugar ) नियंत्रित होती है।  रतौंधी, आँखों से पानी आना, आँखों का लाल रहना आदि विकारो में टमाटर का सेवन लाभकारी है जीभ पर सफ़ेद परत जमना, मुँह का जायका खराब होना, भूख कम लगना, हजम सही न होना, कब्ज रहना आदि परेशानियो में सेंधा नमक लगाकर टमाटर खाना हितकारी है। 

वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश'





















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