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कमर दर्द मिटाए

कमर दर्द  मिटाए  


दर्द का मुख्य कारण वात विकार हो सकता है। अन्य कई कारण उसके सहायक हो सकते हैं। वाट विकृत करने में खान-पान, रहन-सहन, की मुख्य भूमिका होती है। कपडे धोने, झाड़ू लगाने, गीले फर्श पर नंगे पैर काम करने, नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह ना पोछना, बालों को ना सुखाने, आहार-विहार में गड़बड़ी होने, अधिक संभोग, ज्यादा बच्चे होने से भी कमर दर्द होता है। इसकी प्रारंभिक अवस्था में ही अगर खानपान पर ध्यान दिया जाए तो समस्या सीमा में रहेगी। उड़द की दाल, उड़द, राजमा, छोले, गोभी, मैदा, बेसन की चीजें, तेज मसाले, राई, सरसों का साग परहेज उपचार में आवश्यक हैं।







अधिक व्यायाम, उपवास करना हानिकारक हो सकता है।  शरीर को मोटापा, शीतल पेय पदार्थों का सेवन, वातानुकूलित भवनों में निवास, वातानुकूलित वाहनों से यात्रा भी वायु को विकृत कर रोग में वृद्धि करते हैं।

उक्त व्याधि को सहेज ना लेकर कारण खोजकर उपचार करना चाहिए। श्वेत प्रदर या प्रसूति विकार के कारण कमर दर्द हो तो चिकित्सक से सलाह आवश्यक है। सामान्य कारणों से परेशानी हो तो ठंड से बचना, ठंडी वस्तुएं जैसे दही, छाछ, मूली, का  त्याग करना चाहिए।  खाना तजा व हल्का समय पर खाना कब्ज न रहने पाए, इसका विशेष ध्यान रखना लाभकारी है। जरा सी सर्दी-गर्मी से प्रभावित होते है तो मौसम के अनुसार खान-पान रहन-सहन तथा आचरण करना हितकर है। 

कब्ज कई बीमारियों का कारण बन सकती है।  इसीलिए पेट साफ करने का उपाय पहले करना चाहिए इसके लिए रात को सोते समय त्रिफला चूर्ण एक चम्मच दूध या गर्म पानी से या पंचस्कार  चूर्ण रात को गर्म पानी से लेना लाभकारी है।

खाने के बाद पेट में भारीपन लगे या गैस का दबाव लगे तो भोजन के पहले एक चम्मच हिंग्वाष्टक चूर्ण जरा से देसी घी में मिलाकर लुग्दी सी बनाकर एक निवाले के साथ खाएं या खाने के बीच में एक गोली महाशंख वटी चबाएं लाभ मिलेगा। सोंठ का चूर्ण एक चम्मच पानी में डालकर खूब उबालकर दो चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर दिन में दो बार पीना हितकर है।

दशमूल का काढ़ा बनाकर दो से चार चम्मच अरंडी तेल मिलाकर पीना लाभकारी है।

योगराज गूगल या सिंहनाद गुगल या त्रयोदशांग गूगल दो-दो गोली,चंद्रप्रभावटी  दो गोली गर्म पानी या दूध से लेना हितकर है। दशमूलारिष्ट चार चम्मच बराबर पानी में मिलाकर या बलरिष्ट उक्त मात्रा में खाने के बाद दो बार लेना लाभकारी है।

सर्दी के कारण हुए कमर दर्द में महानारायण तेल या सरसों के तेल में चार-पांच कली लहसुन की पकाकर कमर पर लगाना हितकर है।

प्रसव के बाद कमर दर्द में दशमूलारिष्ट और सौभाग्यशुष्ठी  का सेवन लाभकारी है। यदि प्रसव के बाद लगातार कुछ समय उक्त दोनों औषधियों का सेवन किया जाए तो कमर दर्द के अलावा शरीर के अन्य व्याधियों में भी लाभ होगा। बच्चे को शुद्ध दूध मिलेगा। मधुमेह से पीड़ित दवाएं चिकित्सक की सलाह से ही लें।

मेथी के लड्डू, मेथी का साग या सूखी मेथी का चूर्ण बना कर लेना लाभकारी है। मेथी का चूर्ण और सोंठ का चूर्ण और हल्दी बराबर मात्रा में मिलाकर गर्म पानी से लेना भी लाभदायक होता है।

कमर पर तंबाकू का पत्ता गर्म कर बांधना या ढाक का पत्ता, अश्वगंधा का पत्ता या अरंड का पत्ता तेल से चुपड़ कर गर्म करके बांधना लाभकारी है।

अधिक देर बैठना, झुक कर काम करना, झाड़ू लगाना, वजन उठाना आदि कारणों से बचें।

यह सभी उपाय उपचार सामान्य हैं प्रयोग करने से पहले स्थानीय चिकित्सक से परामर्श लें जरूर लें।


वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश'



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