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केले के सेवन से दूर करे कमजोरी

केले के सेवन से दूर करे कमजोरी 









केला अब हर मौसम में उपलब्ध है। बड़, पीपल, तुलसी, आंवले के पेड़ों की तरह यह भी पवित्र माना गया है। मांगलिक कार्यों और धार्मिक समारोहों में इसकी भूमिका से सभी परिचित हैं।

एक सामान्य आकार के केले में शर्करा 22 प्रतिशत, फैट एक प्रतिशत और 116 कैलरी एनर्जी होती है। विटामिन ए,बी,सी और डी भी ।

केला कई बीमारियों में काम आता है। बच्चे को दस्त लग जाने पर पके केले को कटोरी में रख कर चम्मच से घोट कर मक्खन जैसा बना लें और जरा सी मिश्री पीस कर मिला कर बच्चे को दिन में दो तीन बार खिलाएं। लाभ होगा, कमजोरी नहीं आएगी और बच्चे के शरीर में पानी की कमी नहीं हो पाएगी।

ध्यान रहे कि उक्त तरीके से बनाया गया केला जितनी बार खिलाना हो, उसे उसी समय बनाएं। ढक कर रखा गया या काट कर रखा केला न खिलाएं। वह हानिकारक हो सकता है। नकसीर आने पर इसकी जड़ का रस निकाल कर दो- दो बूंद नाक में डालने से खून आना बन्द हो जाता है। बार बार नकसीर आए तो पके केले के छोटे- छोटे टुकड़े काट कर दूध में डालकर मिश्री मिलाकर खाना खिलाना लाभकारी है।

मिट्टी खाने के आदी बच्चों को इसका गूदा खूब फेंट कर जरा सा शहद मिला कर आधा आधा चम्मच खिलाना उपयोगी है।

जी मिचलाए तो पका केला कटोरी में फेंट कर एक चम्मच मिश्री या चीनी और एक छोटी इलायची पीस कर मिला कर खाने से राहत मिलेगी।

प्यास अधिक लगती हो तो पका केला घोंट कर पानी में घोलें और चीनी मिला कर शरबत बना लें। आधा आधा गिलास दिन में दो तीन बार लें।

पेशाब में जलन हो, रुक रुक कर पेशाब आ रहा हो तो केले के पेड़ का ताजा रस पिलाना चाहिए। धातु दुर्बलता और शारीरिक दुर्बलता में पका केला खाने से लाभ होगा। प्रदर रोग ल्युकोरिआ में पका केला खाना उपयोगी है। पेचिश में कच्चे केले की सब्जी चावल के साथ खानी चाहिए। दुबले शरीर और कम वजन वालों को पका केला दूध के साथ या बिना दूध खाना हितकारी है।

कोई भी चीज मात्रा से अधिक खाना पीना हानिकारक है। इसी तरह केला भी ज्यादा खाने से पेट पर भारी पड़ेगा, शरीर शिथिल होगा, आलस्य आएगा। कभी ज्यादा खा लिया जाए तो एक छोटी इलायची चबाना लाभकारी है।

कफ प्रकृति वालों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। हमेशा पका केला ही खाएं।


वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश '

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