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आंखों में रोहे इलाज में समझदारी

आंखों में रोहे इलाज में समझदारी


पोथकी आंखों का भयंकर रोग है। इसके करण व्यक्ति अंधा भी हो सकता है।  इस बीमारी की शुरुआत आंख दुखने से होती है, आंखें लाल हो जाती हैं आंखों से मवाद बहने लगता है। धुल और संक्रमण जीवाणु पहुंचकर संक्रमण बढ़ाते हैं। इससे आंखों में सूजन आने लगती है और पलकों के नीचे अंदर की तरफ दाने निकल आते हैं। विशेषज्ञों  के अनुसार पोथकी की एक संक्रामक रोग है।  बच्चों का खेलना कष्टकारी होता है। अंधविश्वास और घरेलू उपचार के कारण यह रोग बढ़ जाता है।  समझदारी इसी में है कि तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।








सावधानी:-


  1. किसी को घर में यह बीमारी हो तो उसका तोलिया, रूमाल, दूसरे प्रयोग में लाए से संक्रमण फैलता है। 
  2. सफाई का विशेष ध्यान रखें।  
  3. धूप में ना घूमें, तेज मसालों का सेवन ना करें।  
  4. बार-बार आंखों को ना छुए इससे परेशानी और बढ़ती है


आयुर्वेदिक उपचार:-

रात को सोते समय ठंडे पानी से आंखों को धोएं। हरड़, बहेड़ा, आंवला, (त्रिफला चूर्ण) रात को पानी में भिगो दें फिर उस पानी को छानकर उससे आंखें धोए।  इससे संक्रमण से बचाव होगा।   फिटकरी  को तवे पर फुलाकर जरा सा  गुलाब जल में डालकर दो-दो बूंद डालने से जल्दी फायदा होता है।  नीम के पत्ते, सेंधा नमक, सोंठ  को पीसकर इसका लेप आंखों की पुतलियों पर लेप करने से आंखों की खुजली, दर्द कम होता है। बाल्टी के ठंडे पानी से आंखें डुबोकर खोलना बंद करना आंखों के लिए उत्तम व्यायाम है।  इससे आँखे स्वस्थ और निरोग रहेगी।


वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश '



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