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बदलते मौसम में लगने वाले छोटे छोटे रोग

बदलते मौसम में लगने वाले छोटे छोटे रोग






इस मौसम में भी मौसमी बुखार, गले की खराश, खांसी, दस्त, उल्टी, जुकाम, एलर्जी की परेशानियां खूब बढ़ रही हैं। अगर बीमारी के हमले के तुरंत बाद घरेलू उपचार अपना लिया जाए तो आने वाली बड़ी समस्या से बचाव हो सकता है। 
समय बदल रहा है। दिन में गर्मी रात को ठंड दोपहर भी राहत वाली नहीं। उस पर बीच-बीच में आंधी-तूफान के साथ बारिश। यह सब सेहत के लिए परेशानी पैदा करने वाली स्थिति है। ऐसे मौसम में सेहत बिगड़ने पर तत्काल घरेलू उपचार की जरूरत महसूस होती है। 

आइए जानें कि किस समस्या में क्या उपचार किया जाए। इन उपायों को अपनाने से पहले चिकित्स्क की सलाह जरूर ले।  

बरतें सावधानियां:-  नहाते समय शरीर की स्थिति के अनुसार ही ठंडा या गर्म पानी लें। नाश्ता हल्का तथा तलाभुना न हो। भोजन ताजा सुपाच्य हो। शीतल पेय, आइसक्रीम, ठंडे शर्बत कुल्फी से परहेज करें।
नहाने के समय सरसों का तेल उंगली की सहायता से दोनों नाकों (नथुनों), दोनों कानों व नाभि में लगाना न भूलें। रात को एसी का प्रयोग न करें तो अच्छा है। सोते समय हल्के कपड़े पहन कर सोएं। खुले अंगों पर मिट्टी के तेल व सरसों के तेल का मिश्रण लगा कर सोएं।

क्या है उपचार

ज्वर होने पर : मृत्युंजय रस एक गोली चने की दाल के बराबर गोदन्ती भस्म मिला कर शहद की सहायता से दो बार लेना लाभकारी है। तुलसी के पत्तें का रस एक-एक चम्मच दिन में दो बार लेना भी फायदेमंद है।

गले की खराश : इस स्थिति में ठंडी चीजों का त्याग करें। गर्म पानी में नमक, हल्दी मिला कर गरारे करें। गर्म पानी में विक्स या बाम डाल कर सूंघें। दर्द हो तो चार कली लहसुन की उबाल कर उस पानी से गरारें करें।

खांसी : सूखी हो या गीली या एलर्जी के कारण, हल्दी बड़ा लाभ करती है। एक चम्मच हल्दी का चूर्ण गर्म पानी से या तवे पर भून कर शहद मिला कर दो बार लेने से या प्याज का रस एक चम्मच शहद मिला कर लेने से काफी लाभ होता है।

उल्टी हो तो क्या करें : इसके लिए लौंग को पानी में उबाल कर ठंडा करके देना लाभकारी है। हरे धनिए का रस पिलाना भी फायदेमंद है। उल्टी में नींबू का शर्बत बना कर पिलाना और चूसने को बर्फ के टुकड़े देना भी लाभकारी है।

एलर्जी भी हो सकती है: अचानक छींके आने लगें, अचानक खुजली होने लगे तो काली मिर्च पीस कर देशी घी में मिला कर लेना हित कर है। नीम का तेल लगाना भी लाभकारी है।

वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय ‘हरीश’

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