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हैजा दवा से जरुरी है परहेज

हैजा दवा से जरुरी है परहेज 


गर्मी के मौसम में हम प्यास लगने पर जैसा भी, जंहा भी पानी मिलता है, पी लेते है।  सड़को पर बिकने वाले कटे-फल जैसे - तरबूज, ककड़ी गर्मी और प्यास में अच्छे लगते है।  लेकिन गंदा पानी, कटे-फल, अधिक शीतलपेय, चटपटे पदार्थ आदि का सेवन करने से आप है हैजे का शिकार हो सकते है।  गर्मी में यह रोग संक्रमण से फैलता है।  संक्रमण किस चीज से कब हो जाये इसका पता ही नहीं चलता। मक्खिया इस रोग को फ़ैलाने में मदद करती है।  इन्ही के माध्यम से हैजे के जीवाणुओं कम से कम समय में बहुत दूर तक फैले जाते है।  इन जीवाणुओं को कॉलरबाइब्रिओ के नाम से भी जाना जाता है।  इसके फलस्वरूप उलटी और दस्त शुरू हो जाते है।  उलटी और दस्त साथ साथ होना ही हैजा की आसान पहचान है।  उलटी दस्त के साथ पेट में ऐठन और बेचैनी भी होने लगती है।  





कारण:-  

प्रकृति के विरुद्ध आहार-विहार बासी भोजन, दूषित जल, गले-साढ़े या कटे खुले फल, शीतल पेय के सेवन से पाचन शक्ति क्षीण होती है।  हाजमा कमजोर होने पर उक्त जीवाणुओं का हमला होने की संभावना रहती है।  हैजा के जीवाणु उलटी-दस्त के साथ बाहर निकलते है यह सूक्ष्म जीवाणु पानी में कई दिन जीवित रह सकता है।  गंदे पानी में उपजी या धोई सब्जिया भी उक्त रोग का कारण बन सकती है।  ग्रामीण वातावरण में उल्ट-दस्त मिटटी में दबा देना चाहिए।  इससे मक्खियों द्वारा फैलने वाला संक्रमण रुक जाएगा।  इस रोग से बचने के लिए आम उपाय यह है की धुप में कम निकले।  दूषित पानी, बासी खाने से बचे।  यथा सम्भव शरीर को सूती कपड़े से ढंक कर चले।  

लक्षण:- 

इस रोग के शुरू होते ही जी मिचलाता है।  शरीर में बेचैनी, आंतो में ऐठन, हाथ-पांवो में दर्द व सिर में दर्द होने लगता है।  उलटी दस्त के कारण शरीर में पानी से कमी हो जाती है।  इससे शरीर में कम्पन और घबराहट होने लगती है।  इस रोग से शरीर में नमक की मात्रा भी कम हो जाती है।  

उपचार :- 

प्राथमिक उपचार में निम्बू की शिकंजी डालकर पिलानी चाहिए।  इससे प्यास  भी अधिक लगती है।  गला, होंठ सूखने लगते है ऐसे समय में बर्फ चूसना लाभकारी है।  

पानी में लौंग उबाल कर थोड़ा से नमक डालकर थोड़ा-थोड़ा पिलाने से प्यास कम होगी और शरीर में नमक की पूर्ति होगी।  उलटी में भी लाभ होगा।  

हाथ-पांव की ऐठन वाली जगह पर तारपीन के तेल से कपूर मिलाकर लगाए या जायफल को पानी में घिस कर लेप करना हितकारी है।  

पेडू पर गीला तौलिया रखने से और खाने वाला सोडा पानी में घोल कर पेट पर लेप करने से पेशाब आने लगेगा, रोगी को चैन मिलेगा।  

सौंफ का अर्क या सोंफ उबाल कर ठंडा किए पानी मे मिला पिलाना लाभकारी होता है।  बेल का शर्बत, कच्चे आम का पानक, अनार का शर्बत, चावल का मांड का सेवन भी लाभदायक है। उबाल कर ठंडा किया गया पानी ही प्रयोग करे।  यह प्राथमिक उपचार चिकित्सक की सलाह से ही करे।  

जरुरी बातें :-

साफ - सफाई का विशेष ध्यान रखें।  

बाजार से बिक्री होने वाले कटे-फलो को खरीदने से बचे।  

यदि कम गहराई में बोरिंग हो या फिर हैंडपइप की बोरिंग गहरी नहीं है, तो पानी उबाल कर पीना चाहिए।  

घर से निकलने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी चाहिए।  सम्भव हो तो पानी की बोतल साथ लेकर जाये।  

निम्बू की शिकंजी, नारियल, लस्सी, छाछ, सत्तू या फिर पना पीना चाहिए।  

गर्मियों में हल्का भोजन करे।  

वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश'


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