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पाचन शक्ति बढ़ाये रोग मिटाए बथुआ

पाचन शक्ति बढ़ाये  रोग मिटाए बथुआ


बथुआ एक ऐसी सब्जी या साग है, जो गुणों की खान होने पर भी विशेष परिश्रम और देखभाल के खेतों में स्वता ही उग  जाता है। एक डेढ़ फुट का यह भरा पौधा कितने ही गुणों से भरपूर है।  बथुए के पराठे और रायता तो लोग चटकारे लगा कर खाते हैं लेकिन वह इसकी औषधीय गुणों से ज्यादा परिचित नहीं है, बता रहे हैं वैद्य हरि कृष्ण पाण्डेय  'हरीश' 








  • इसकी पत्तियों में सुगंधित तेल, पोटाष तथा अलव्युमिनॉयड पाए जाते हैं। दोष क्रम की दृष्टि से यह त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) शांत करने वाला है। आयुर्वेदिक विद्वानों ने बथुआ को भूख बढ़ाने वाला पित्तशामक, मूत्र को साफ और शुद्ध करने वाला माना है। यह उपयोगी तथा पेट के कीड़ों का नाश करने वाला है। 
  • यह पाचन शक्ति बढ़ाने वाला, भोजन में रूचि बढ़ाने वाला पेट की कब्ज मिटाने वाला और स्वर को मधुर बनाने वाला है। 
  • गुणों में हरे से ज्यादा लाल बथुआ अधिक उपयोगी होता है। इसके सेवन से वात, पित्त, कफ के प्रकोप का नाश होता है और बल बुद्धि बढ़ती है। 
  • लाल बथुआ के सेवन से बूंद बूंद पेशाब आने की तकलीफ में लाभ होता है टी.बी. की खांसी में इसको बादाम के तेल में पकाकर खाने से लाभ होता है।
  • नियमित कब्ज वालो को इसके पत्ते पानी में उबालकर शक़्कर मिलाकर पीने से बहुत लाभ होता है। यही पानी मसाने के लिए भी लाभकारी है। इस पानी से तिल्ली की सूजन में लाभ होता है। सूजन अधिक हो तो उगले पत्ते को पीसकर तिल्ली  पर लेप लगाएं। 
  • लाल बथुआ हृदय को बल देने वाला है फोड़े-फुंसी मिटाकर खून साफ करने में भी मददगार है। 
  • बथुआ लीवर के विकारों को मिटाकर पाचन शक्ति बढ़ा कर रक्त बढ़ाता है। शरीर की शिथिलता मिटाता है। 
  • लीवर के आसपास की जगह सख्त हो उसके कारण पीलिया हो गया हो तो 6 ग्राम बथुए के बीज सवेरे शाम पानी से देने से लाभ होता है।  
  • बीजों को सिल पर पीसकर उबटन की तरह लगाने से शरीर का मैल साफ होता है, चेहरे के दाग धब्बे दूर होते हैं। 
  • तिल्ली की बीमारी और पित के प्रकोप में इसका साग खाना उपयोगी है। 
  • इसका रस जरा-सा नमक मिलाकर दो-दो चम्मच दिन में दो बार पिलाने से पेट के कीटाणु से छुटकारा मिलता है। 
  • पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर पिलाने से पेशाब खुलकर आता है। 
  • इसका साग खाने से बवासीर में लाभ होता है पखाना खुलकर आता है। दर्द में आराम मिलता है। 
  • इसके काढ़े से रंगीन और रेशमी कपड़े धोने से दाग धब्बे छूट जाते हैं और रंग सुरक्षित रहते हैं। 
  • अरुचि,अजीर्ण भूख की कमी,कब्ज, लीवर की बीमारी पीलिया में इसका साग खाना बहुत लाभकारी है। 
  • सामान्य दुर्बलता बुखार के बाद की अरुचि और कमजोरी में इसका साग खाना हितकारी है धातु दुर्बलता में भी बथुए का साग खाना लाभकारी है।  

वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश'

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