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सावधानी बरतें कहीं लग न जाए लू....

सावधानी बरतें  कहीं लग न जाए लू..... 


जो लोग शारीरिक रुप से कमजोर हो, लंबी बीमारी से उठे हो, जिनकी रोग प्रतिरोधक शक्ति क्षीण हो, उनको लू लगने का भय अधिक होता है। जिस व्यक्ति को लू लग जाती है वह अत्यधिक उत्तेजित और विचलित हो घबराने लगता है। सिर में दर्द, उल्टी या उल्टी का मन करना, दिल घबराना, आंखों के आगे अंधेरा आना, त्वचा का रंग लाल होना, और नाड़ी की गति तेज होना यदि ऐसे लक्षण हैं जिनसे पता लगता है कि फ़ला व्यक्ति को लू लग गई है।







तेज धूप के कारण वातावरण अधिक गर्म हो जाता है। इस दौरान चलने वाली तेज गर्म हवाएं, जिन्हे लू के नाम से जानते हैं, से सांस लेने में भी परेशानी होने लगती है, पसीना निकलने लगता है, शरीर में पानी की कमी हो जाती हैं ऐसे में लंबे समय तक सिर पर सीधी सूर्य की किरणें पड़ने से पीड़ित व्यक्ति का स्नायुतंत्र प्रभावित होने लगता है, जो व्यक्ति को बेहोश तक कर सकता है।

लू लगने पर होने वाले बुखार में शरीर का तापमान 104 से 107 डिग्री तक पहुंच जाता है। रोगी अपने पर नियंत्रण रख पाने में असमर्थ होता है। बेहोशी की हालत में पाखाना,पेशाब तक निकल जाता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर इन्हें सहजता से ना ले और शीघ्रता से प्राथमिक उपचार करें।

यू करें प्राथमिक उपचार प्राथमिक


प्राथमिक उपचार में पीड़ित को सबसे पहले ठंडी जगह ले जाएं, कपड़े ढीले कर दें, हवा को पर्याप्त रास्ता दे, संभव हो तो कूलर, पंखा या AC का सहारा लें। सर पर धीरे-धीरे ठंडा पानी डालें, छाती पर मोटा कपड़ा या तौलिया भिगोकर निचोड़ कर रखें, थोड़ा-थोड़ा पानी भी मुंह में डालते रहें, संभव हो तो बर्फ का टुकड़ा फोटो पर लगाते रहें।  इसके अतिरिक्त प्याज का रस, नींबू का रस, शिकंजी देना भी लाभकारी है।

यदि त्वचा में रूखापन, आंखों की पुतली में फैलाव, चक्कर और मूर्छा हो तो बिना देर किए नजदीकी अस्पताल की शरण में जाना हितकर है। सामान्य अवस्था में आने पर दूध में बर्फ मिलाकर पिलाना बेहतर है।  ठंडे पानी में कच्चा जीरा डालकर थोड़ी देर रख दें, कुछ देर बाद छानकर दो दो चम्मच पिलाने से भी शीघ्र फायदा होगा।

काला नमक, नींबू, प्याज का रस मिलाकर चाटने से आराम मिलता है। कच्चे आम को आग पर भून कर या उबाल कर मथकर मिश्री मिलाकर पिलाने से फायदा मिलता है। कुछ विद्वानों का मत है कि आम रस शरीर पर मलने से भी लाभ होता है।

लवण भास्कर चूर्ण को लस्सी या दही में मिलाकर देना भी फायदेमंद रहता है। उल्टी का मन करे या होंठ  सूखे हो तो बर्फ चूसे और होंठ पर भी मेल।  पेशाब में जलन हो या ना आ रहा हो तो गीला कपड़ा नाभि के नीचे रखें या खाने का सोडा पानी में घोलकर नाभि के नीचे लेप करें।

अन्य उपाय:-

  • इमली को पानी में मैथकर या तुलसी के पत्तों का रस चीनी मिलाकर पिलाना लाभ करता है। 
  • प्याज को आग में भूनकर, मिश्री और जीरा मिलाकर खिलाना, बेहतर है। दस्त आने लगे तो बेल का शरबत, बेल का चूर्ण लाभकारी है।
  • धूम में कम से कम निकले। निकलना आवश्यक हो तो पूरे बाजू की सूती कमीज पहने, सिर ढक कर रखें वातानुकूलित भवनों में प्रवेश और निकास के समय जल्दी ना करें, रुक कर आए जाए। 
  • स्वच्छ पानी पिए।  रेहड़ी का या हैंडपंप के पानी से बचें, नींबू पानी, शिकंजी, आम का रस, सौंफ का अर्क, पुदीने का अर्क, नारियल पानी, ठंडाई सेवन करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। 

वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश '




















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