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सौंठ लाख गुणों की एक दवा

सौंठ लाख गुणों की एक दवा 

सोंठ के कंद की अदरक कहते है जिसका छिलका उतार  कर  सुखा  लेते है, वह आम सोंठ है तथा छिलका निकाल कर दूध में उबाल कर सुखा लेने से दूधिया सोंठ बन जाती है।  यह देशभेद तथा निर्माण प्रक्रिया भेद से कई प्रकार की होती है, लेकिन सामान्य अदरक की छाल हटा कर सुखा भी ली जाती है है वही सोंठ कहलाती है।  







सोंठ तासीर से गर्म होती है।  इसके उपयोग से पाचन शक्ति प्रबल होती है।  खांसी, जुकाम, आंतो की दुर्बलता, वायु दोष तथा उदर शूल को यह शमन करती है।  

औषधीय गुण 

  • मसूड़े फूलने से पीड़ा होती हो तो तीन ग्राम सोंठ का चूर्ण चार दिन तक गर्म पानी से लेने से दर्द मिटेगा सूजन हट जाएगी, मसूढ़े ठीक हो जाएंगे।  
  • पेट में दर्द, खट्टी डकारे, अफ़ारा हो तो दस ग्राम सोंठ, दस ग्राम अजवाइन पीस कर नींबू के रस में भिगोकर थोड़ा सा नमक मिलाकर छाया में सुखा ले।  
  • सिर में दर्द रहता हो तो सोंठ को चंदन की तरह पत्थर पर घिस कर लेप करने से दर्द मिट जाता है।  
  • हाथ पांवो में या कमर में वायु का दर्द हो तो सो ग्राम सोंठ को आधा लीटर दूध में रात को भिगों कर रखे।  सवेरे सोंठ निकाल कर पत्थर पर पीस कर पिट्ठी बना ले, एक किलो आटा घी में भून कर सोंठ के साथ आधा किलो चीनी मिलाकर रख ले।  सवेरे शाम एक चम्मच उक्त मिश्रण दूध से लेने  से लाभ होगा।  सोंठ भिगोया हुआ दूध काम में न लें।  
  • अदरक का रस एक तोला, शहद एक तोला दिन में दो बार लेने से खांसी, जुकाम, दमा में लाभ होता है।  पर ध्यान जरूर रखें  - अदरक का रस गर्म करके ठंडा होने पर ही शहद मिलाए।  
  • अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके थोड़ा-सा नमक मिलाकर गर्म तवे पर सेंक कर एक टुकड़ा मुंह में दबा कर चूसने खांसी से लाभ होगा।  इन्ही टुकड़ो को खाने के साथ या खाने से पहले खाने से भूख खुलकर लगेगी तथा हाजमा ठीक होगा।  पेट का भारीपन मिटेगा।  
  • अदरक का रस और प्याज का रस मिलाकर पीने से उलटी होना बंद हो जाता है। 
  • जुकाम हो, गला बैठा जाए, खांसी हो, तो अदरक का रस गर्म करके एक चम्मच शहद मिला कर दिन में दो बार लेने से आराम होगा। 
  • बच्चो को बार - बार लगने वाली सर्दी, जुकाम, छाती की जकड़न में अदरक का रस आधा चम्मच, चार-पांच तुलसी के पत्ते, अदरक के साथ ही पीस कर रस निकल लें।  इसे गर्म कर ठंडा  होने पर शहद मिलाकर देने से राहत मिलती है।  बच्चा सर्दी जुकाम से बचता है 

वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश'

 

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