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गर्मियों में उपयोगी ठंडाई


प्रकृति के नियम अनुसार मौसम बदलते हैं अब शीतकाल समाप्ति की तरफ है और उष्णकाल  यानी गर्मी आने को तैयार है जैसे ठंड के मौसम में बचने एवं इससे प्रभावित ना होने के उपाय किए थे, गर्मी में भी कुछ उपाय करने पड़ेंगे  जो हमे इसके  प्रकोप से बचाएं। 





जिन प्रदेशों में गर्मी ज्यादा पड़ती हैं वहां के निवासी गर्मी में राहत देने वाले कई पदार्थों का सेवन करते हैं। हरियाणा राजस्थान में राबड़ी या शीतराबड़ी जो छाछ और आटे की मिश्रण से उबाल कर  बनाकर रात को दूध के साथ और सवेरे छाछ में मिलाकर खाते हैं इसमें हरा प्याज मिलाने से इसका स्वाद और गुण बढ़ जाते हैं।

यह राबड़ी पीने से भीषण गर्मी में भी सुरक्षित रहते हैं।  इसी प्रकार उत्तर प्रदेश बिहार में सत्तू का प्रयोग करते हैं जो जौ , चने को भूनकर बनाया जाता है।

 महानगरों में रहने वाले भी कभी ना कभी किसी प्रदेश के गांव कस्बों के रहने वाले ही थे मगर अब वह शहरी हो गए हैं और उक्त गांव वाली खाद्य पदार्थों से दूर हो गए हैं। 

मौसम का असर तो गांव वालों शहर वालों पर  प्रभाव तो  जरूर दिखता है। कहीं काम तो  कहीं ज्यादा सभी लोग अपनी सुविधानुसार मौसम से राहत पाने का प्रयास भी करते हैं। कस्बों और शहर वाले अब लगभग तैयार पदार्थों का ही सेवन करने लगे हैं जो कई प्रकार के तरल पय  बाजार में उपलब्ध हैं।

पहले लोग घरों में ही शीतल पेय स्वादिष्ट पेय  तैयार करते थे जो  स्वास्थ्य  के लिए हितकर होते थे  उनमे से एक प्रसिद्ध नाम है ठंडाई जी हां ठंडाई जिसमें विभिन्न खाद्य सामग्री डालकर सिल पर बट्टे द्वारा खूब घोट  पीसकर तैयार की जाती थी।

जो स्वाद के साथ स्वास्थ्य के लिए उपयोगी तो होती ही थी कई बीमारियों में भी लाभ करती थी आज उसी ठंडाई के बारे में बताएंगे कैसे बनाई जाती है और किन-किन बीमारियों को दूर करती है। 

ठंडाई बनाने का तरीका और फायदे


यदि ठंडाई को सही तरीके से बनाया जाए तो अमृत से कम नहीं जल्दी में लोग इसको अपने तरीके से बनाते हैं। . नतीजा अपना वास्तविक स्वाद और गुण गायब।  ठंडाई का प्रमुख घटक बादाम रात भर पानी में भिगोकर सवेरे छिलका उतारकर पत्थर पर पीसकर या अन्य सामग्री के साथ मिलाकर उपयोग किया जाएगा तो शीतल गुण प्रदान करेगा अन्यथा नहीं।  किसी खाद्य पदार्थ की तासीर बदलने में पानी की पूर्ण भूमिका होती है जैसे दही की तासीर गर्म होती है लेकिन पानी के मिश्रण मथने  पर छाछ बन जाती है जो ठंडी तासीर की होती है।  इसीलिए ठंडाई के मिश्रण को उचित तरीके से उपयोग करना चाहिए नियम अनुसार बनाई ठंडाई अमृततुल्य हो जाती है। जो दिमाग को ताजगी और शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है।  कहा जाता है समुद्र मंथन के समय भगवान शंकर ने विषपान किया तब उनके शरीर में  बड़ी उष्णता को समाप्त करने के लिए देवताओं के वैद्य अश्विनी कुमारों ने जिस पेय का  आविष्कार किया उसे ठंडाई के नाम से जाना जाता है।

इस की शीतलता के कारण ही भोले बाबा उस गर्मी को झेल  गए तब से ठंडाई में भांग मिलाकर उनको भोग लगाने की प्रथा चल पड़ी। महाशिवरात्रि को बनने वाली ठंडाई में भांग का मिश्रण कर महा शिव को भोग लगाकर प्रसाद रूप भक्त लोगों को भी ग्रहण करते हैं लेकिन मादक वस्तुओं के होने के कारण समाज में इसकी ग्रहणता सहज नहीं है।

पुरातन विधि एवं सामग्री ठंडाई बनाने की


बादाम 50 ग्राम
खसखस 30 ग्राम
तरबूज के चेले बीज 20 ग्राम
खरबूज के चेले बीज 20 ग्राम
ककड़ी के बीज 20 ग्राम
सौंफ 50 ग्राम
काली मिर्च 100 ग्राम
देसी गुलाब की सूखी पंखुड़ियां 20 ग्राम
हरी इलायची 5 दाने
मुनक्का बीज निकाली हुई 8 दाने
मिश्री धागे वाली सौ ग्राम यह स्वाद अनुसार

अब बादाम, खसखस, तरबूज, ककड़ी के बीज, सौंफ, गुलाब की पंखुड़ियां, काली मिर्च, इलायची और मुनक्का को रात भर पानी में भिगोकर रख दें।

सवेरे बादाम के छिलके उतारकर सारी सामग्री के साथ सिलबट्टे से खूब महीन पीसे।  रात वाला पानी ही  मिलाकर पीस कर स्वाद और रंग के लिए जरा सी केसर भी डाल सकते हैं।  पिसी सामग्री एक गिलास पानी में मिलाकर सूती कपड़े या छलनी से छान लें अच्छी तरह छानकर एक गिलास दूध मिला लें आवश्यकतानुसार और पानी मिलाकर 6 गिलास ठंडाई तैयार हो गई माने तो स्वाद के लिए थोड़ी सी बर्फ मिला लें अब उत्तम ठंडाई तैयार हो गई जानिए इसके फायदे। 


  • गर्मी के कारण होने वाली आंखों की जलन, मुंह का सूखना, पेशाब की जलन में लाभ होता है।  


  • दिमाग को शक्ति प्रदान कर प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, हृदय को बल देने वाली है। 


  • आंतों को मदद कर कब्ज मिटाने और कफ में आराम देती है। 


  • शरीर में बड़े प्रकोप को शांत कर स्वप्नदोष और शीघ्रपतन जैसी व्याधियों में लाभ करती हैं। 


  • कई विद्वानों के मत से सफेद चंदन का बुरादा, कमल गट्टा भी मिलाते हैं।  इसमें कच्ची खांड, तगर,  कासनी और मुलेठी का प्रयोग करने से मस्तिष्क का टानिक और संपूर्ण शक्तिवर्धक बनती हैं। 


  • इसके सेवन से अम्लपित्त, पेट की गर्मी, पेट में जलन, मुंह में छाले, आंखों की जलन, पेशाब की जलन, पेट का अल्सर, रक्त प्रदर, श्वेत प्रदर, लू लगना, डायरिया, उल्टी-दस्त, हैजा में अत्यधिक लाभकारी है। 


  • जो लोग शीतल प्रकृति  के होते है उनको सवेरे के समय ठंडाई का प्रयोग नहीं करना चाहिए।  यदि जुकाम हो तो भी इसका सेवन ना करें। दोपहर में उक्त लोग इस का आनंद ले सकते हैं। 

वैद्य हरि कृष्ण पाण्डेय 'हरीश '

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