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छोटा सा जायफल छोटा सा अस्पताल

बहुत सारे पाठक तो जायफल का नाम सुन पढ़कर ही चौक जाएंगे।  साथ ही आश्चर्य अस्पताल मामला समझ से बाहर का है लेकिन जनाब दिमाग पर ज्यादा बोझ डालने की जरूरत नहीं है।  यह है आपकी शंका का समाधान क्या है जायफल?






यह एक पेड़ का फल है जो आकार का बड़ा और शाखाएं नीचे रखने वाला है।  इसी पर पमेली  बेर बड़े बेर के आकार का फल लगता है।  इसके ऊपर एक पीले रंग की झिल्ली (कोषावरण ) जो सूख जाने पर स्वतः  ही उससे अलग हो जाता है।  इसें  "जतिपत्रि  " या जावित्री के नाम से जानते हैं।  इसी मे  निकलने वाला जायफल कहलाता है।

भाषा भेद के कारण इसको जातीफल, जातिकोष, मालती फल, जायफल, जयफल, जाथिकेई,जाजिकेय,जौजबुया और अंग्रेजी मे जटमेडा के नाम से जाना जाता है।  यह हमारे घरों में गर्म मसालों  में प्रयोग किया जाता है।  जो स्वाद के साथ सुगंध भी बढ़ाता है।  पुराने  लोग जावित्री, जायफल का प्रयोग औषधि के रूप में करते थे।
आज  के लोगो को  इन सब जानकारियों में रूचि नहीं  रही।  अगर इसके औषधीय गुणों पर नजर डालें तो निश्चय ही इस को अस्पताल की पदवी दे डालेंगे  .

इसकी विशेषता यह है  कि अपने में बहुत सारे स्वास्थ्य रक्षक और स्वास्थ्यवर्धक गुण समेटे हुए हैं।

इस औषधीय गुणों का परिचय इस प्रकार है।  

जायफल अमाशय को उत्तेजित कर भूख बढ़ाता है।  पेट की गैस की समस्या  हल करता है।

अन्य औषधीय प्रयोग


सर्दी खांसी सवेरे शाम खाली पेट इस का चूर्ण शहद से  लेना लाभ करता है।

पेट दर्द में इसके तेल की पांच बूंद चीनी या बताशे में डालकर लेना पेट दर्द में लाभ करता है।

सिर दर्द में पानी में घिसकर चंदन की तरह माथे पर लगाना हितकर है।

सर्दी ज्यादा लगती हो तो इसका टुकड़ा मुंह में डालकर चूसते रहने से सर्दी से राहत मिलती है।

दस्तों के लिए जायफल को भूनकर सवेरे शाम चूसने से लाभ होता है।

लकवा (फालीस) अर्धांगवात के कारण अंग से शिथिल या असमर्थ हो जाए तो उन अंगों पर इसका चंदन की तरह पानी में घिसकर प्रभावित अंगों पर लेप करने से संचालन शक्ति का विकास होता है निष्क्रिय अंग सक्रिय होने लगते हैं।

प्रसव बच्चा होने के बाद अक्सर जच्चा को कमर दर्द की शिकायत हो जाती है।  ऐसी स्थिति में इसको पानी में घिसकर लेप करने से दर्द समाप्ति का रामबाण इलाज है।

एड़ियों के फटने पर अक्सर सर्दियों में यह समस्या आती है। जायफल को महीन पीसकर एड़ियोंके  घाव  जिनको बिवाई  कहते हैं मैं भरदे घाव भर जाएंगे।

कान के पीछे बनने वाली पीड़ादायक गांठ जो छूने से भी दर्द करती है।  इसको पीसकर या गाढ़ा-गाढ़ा घिसकर गांठ  पर लेप करने से गांठ पिघल जाएगी।

जी मिचलाना उल्टी आने का मन करता हो तो इसको पानी में घिसकर पिलाना लाभकारी है।

शरीर की कमजोरी में इसका सेवन उपयोगी है।

चेहरे  की झुर्रियों  परेशान कर रही है तो इसको घिसकर लेप करो लाभ मिलेगा।

आंखों के नीचे काले घेरे या दाग प्रतिदिन इसका लेप लगाएं।  सूखने पर धो डालें कुछ ही समय में फर्क मालूम होगा। लगाते समय आंखों का बचाव करें।

अनिद्रा, नींद की कमी सोते में बेचैनी महसूस हो तो इसका तेल त्वचा पर लगाकर सोए नींद अच्छी आने लगेगी और चमड़ी भी तरोताजा रहेगी।

दांत दर्द के लिए इसका तेल रुई पर लगाकर दर्द वाले दांत पर रख दे दर्द शांत होगा।

मुंह के छालों छालों के लिए इस को पानी में उबालकर ठंडा कर कुल्ला करें। गरारे करें।  लाभ मिलेगा
उक्त सभी उपचार उपाय सामान्य है।  प्रयोग करने से पहले अपने स्थानीय चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।


वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश '

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