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लौंग देखने में छोटी औषधीय गुणों से भरपूर

लौंग देखने में छोटी औषधीय गुणों से भरपूर



दांत दर्द हो गया हो या मचली होने लगी हो तो अक्सर सुना होगा लौंग दे दो।  यह किसी परिचय की तो मोहताज नहीं है लेकिन ज्यादातर तो इसको रसोई के मसालों में ही मानते हैं।

सदा हरा भरा रहने वाला इस का पेड़ लगभग 30 - 40 फीट ऊंचा होता है जो दक्षिण भारत के ट्रावनकोर   में ज्यादा होता है।   अनेक औषधीय गुणों से भरपूर लोंग सब जगह आसानी से मिलने वाली है।  जो भाषा या प्रांत भेद के कारण देव कुसुम,  चंदन पुष्पक , वारीज, लौंग,   किरांबू  कारावाल्लु और क्लोव के नाम से भी जानी जाती है।


लौंग सुगंधित के साथ साथ गर्म और खुश्क भी  होती है।  इसका पाचन क्रिया पर सीधा लाभकारी प्रभाव होता है। (अमाशय )पेट में रस प्रक्रिया  को बलवान बनाकर खाने में रुचि पैदा करती है।

इसका प्रयोग भिदोषशामक होता है।  यह दुर्बलता और नपुंसकता नाशक है।  इसका सेवन दिमाग को पुष्टि प्रदान करता है।  इसका सेवन से मुखका  बिगड़ा स्वाद ठीक होता है। मुखकी  दुर्गंध मिटा देती है।  पेट दर्द को शांत कर अम्लपित्त के विकारों को शांत करती है।

साग - सब्जियों में गरम मसाले के तौर पर इस्तेमाल की जाती है।  इसका तेल दांत के खोखले पन के दर्द में तुरंत आराम करता है।  प्रोटीन,  विटामिन,  कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन ए और बी भी पाए जाते हैं।

खाने के बाद दोनों समय एक एक  लोंग मुंह में रख कर चूसने से अम्लपित्त (खट्टी डकार) में लाभ होता है।  बुखार चरम रोग,  रक्त प्रदर, रक्तपित्त और हृदय दिल की बीमारी के लिए भी उपयोगी है.

लौंग का विभिन्न बीमारियों में प्रयोग किस प्रकार करें:- 

सिरदर्द लॉन्ग का तेल 5 बूंद नारियल के तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं लाभ होगा।

दांतदर्द हो  तो इसके तेल में जरा सा रुई का फोया  भिगोकर दांत दर्द वाले स्थान पर लगाना हितकर है।

हिचकियां आए तो दो लौंग चबा कर थोड़ा सा पानी पिए लाभ होगा।

गले में सूजन हो तो इसको आग पर भूनकर चूसना लाभकारी है।

पेट की परेशानी में लौंग, सेंधा नमक और छोटी हरड़ मिलाकर चूर्ण बना लें खाने के बाद दोनों समय पानी से लें।

गले में कफ जम रहा हो तो इसको सेंक  कर मुंह में रख चूसे।

उलटी  या जी मिचलाने की शिकायत हो तो इस को पीसकर पानी में उबालकर शक्कर मिलाकर पीने से उक्त समस्या दूर होगी।

स्वास रोगी (अस्थमा) वाले पांच लौंग आधा पाव पानी में खूब पकाएं शहद मिलाकर दिन में तीन बार पिए लाभ होगा।

पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए इसका नियमित सेवन करें।

कुकर खांसी में  दो लॉन्ग को भूनकर पीसकर चूर्ण बनाकर शहर से दिन में दो बार चाटे।

गर्भवती महिलाओं को उल्टियां लगने पर इसका चूर्ण शहद से चटाना लाभकारी है।

मुंह की दुर्गंध आती हो तो खाने के बाद एक एक लौंग दोनों समय धीरे धीरे चबाए।

जुकाम में लॉन्ग का काढ़ा बनाकर पीना हितकर है  या दो बूंद इसका तेल शक्कर दो चम्मच में मिला कर लेना लाभकारी है।  इसके तेल को रुमाल में दो-चार बूंद लगाकर सूघना  आरामदायक है।

बुखार में एक एक  लौंग पीस कर गर्म पानी से दिन में तीन बार लेना लाभ करता है।

आंखों के नीचे ऊपर वाली जगह पलकों पर निकले दानो पर इसको साफ पत्थर पर पानी के साथ घिसकर सावधानी से लगाएं।

खांसी सुखी हो गीली सवेरे शाम लौंग सूचना लाभकारी है।  लौंग और अनार का छिलका पीसकर शहद से  लेना लाभकारी  है।

बुखार में प्यास लगे तो 3 -चार लौंग पानी में उबालकर ठंडा करके रख लें जब भी गला सूखने लगे प्यास लगे तो दो दो चम्मच दिन में कई बार पिलाये लाभ होगा।

जीभ  में कट लगजाए खाने के समय कई बार जीभ दांतो के तले आ जाती है और कट जाती है तो एक लौंग मुंह में दबाकर रखिए दर्द और कट मिट जाएगा।

मुंह के छालों के लिए लौंग के साथ इलायची चबा कर चूसने से छालों में आराम मिलेगा।

उक्त सभी उपचार सामान्य हैं प्रयोग करने से पहले अपने स्थानीय चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

वैध हरि कृष्ण पाण्डेय "हरीश "

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