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घरका डाक्टर छोटी सी हरड़


घर का डाक्टर छोटी सी हरड़


आयुर्वेद में प्रमुखता। से प्रयोग की जाने वालीछोटी सी हरड़ किसी परिचय की मोहताज नहीं है।इसका तो गांव से लेकर महानगरों तक खूब प्रयोग होता है। आयुर्वेद की प्रसिद्ध औषधी त्रिफलाचूर्ण हरड़ के बिना बन ही नहीं सकता।हरड़ बहेड़ा आंवला तीनों को मिला कर बनाया जाता है।जो आंख धोने  और पेट साफ करने जैसी समस्याओं में मददगार है।इसी को त्रिफलाचूर्ण कहते हैं।




अकेली हरड़ का भी अनुपान भेद से कमी बिमारियों में प्रयोग किया जाता है।हर ऋतु में और हर मौसम में इसके सेवन करने का तरीका अलग होता है। खाने के भी कमी प्रकार हैं भूख कम लगती तो चबा कर खावो।ख़बरें रहती है तो इसकी चटनी बाना कर खावो।और इसको भून कर खाई जात तो (त्रिदोष)यानी वात कफ की विक्रति दूर करती है। भोजन साथ खाने से पाचन सही करती है।

बलपौरुष में ब्रृध्दिकर बुद्धिका विकास करती है। पेशाब पखाना साफ लाती है।हरड़ के सेवन से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।बहते खून पर इसका चूर्ण या इसका काढ़ा बनाकर प्रयोग करने से खून का बहाव रूक था है।इसका काढ़ा बना कर गर्भाशय धोने से सूजन मिटती है।कुल्ला करने से मूंह के छाले ठीक होते हैं।

बवासीर में इसका लेप लगाने से दर्द और जलन में लाभ होता है। दांत दर्द में इसका महीन चूर्ण बना कर मंजन करने से लाभ होता है।इसी के काढ़े से कुल्ला करने से मसूडों से आता खून बन्द होता है।ठंडा गर्म पानी लगता हो काढ़े से कुल्ला करना हितकर है।काढ़े का कुल्ला करने से मूंह की दुर्गन्ध नष्ट होती है।

अस्थमा (दमा)के दौरे वाले इसको पीस कर तंम्बाखू की तरह चिलम में कर पीना लाभकारी है।आंखों में लाली रहती हो जलन होती हो तो रात को इसका चूर्ण एक चम्मच एक गिलास पानी में भिगो दें उस पानी से आंख धोने से लाभ होगा।मलेरिया बुखार में इसका चूर्ण शहत में मिलाकर चाटना हितकर है।



वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय हरीश



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